
कर्नाटक : कावेरी जल बंटवारे के मुद्दे को लेकर रविवार को राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेता एक मंच पर आए। राज्य के सामने मौजूद चुनौतियों और विशेष रूप से तमिलनाडु के साथ लंबे समय से चले आ रहे कावेरी जल विवाद पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई।
बैठक में राज्य के विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया और कावेरी नदी के पानी के उपयोग, जल उपलब्धता, किसानों की चिंताओं और अंतरराज्यीय जल विवाद से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया। बैठक का उद्देश्य इस संवेदनशील मुद्दे पर राज्य की एकजुट रणनीति तैयार करना था।
बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, पूर्व केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली, पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा, एच.डी. कुमारस्वामी, बसवराज बोम्मई, केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे सहित कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। सभी नेताओं ने कावेरी जल विवाद को राज्य के किसानों और जल सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया।
बैठक के दौरान तमिलनाडु को पानी छोड़ने के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा हुई। नेताओं ने राज्य में मौजूद जल संकट, बांधों में पानी की उपलब्धता और किसानों की जरूरतों पर अपनी राय रखी। कर्नाटक सरकार के सामने यह चुनौती है कि वह एक ओर अंतरराज्यीय जल समझौतों और संबंधित प्राधिकरणों के आदेशों का पालन करे, वहीं दूसरी ओर राज्य के किसानों और आम जनता की जरूरतों को भी पूरा करे।
पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा कि तमिलनाडु को पानी छोड़ने से जुड़ी व्यावहारिक कठिनाइयों को समझना जरूरी है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के आदेशों का पालन करना आवश्यक है। उन्होंने इस पूरे विवाद का स्थायी और वैज्ञानिक समाधान निकालने पर जोर दिया।
सिद्धारमैया ने कहा कि जल विवादों का समाधान भावनाओं के आधार पर नहीं बल्कि उपलब्ध आंकड़ों, जल संसाधनों की स्थिति और वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए एक दीर्घकालिक योजना तैयार करने की जरूरत है।
बैठक में नेताओं ने राज्य में जल संकट और मानसून की स्थिति पर भी चर्चा की। कावेरी बेसिन के कई इलाकों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई गई। किसानों का कहना है कि सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिलने से उनकी फसलों पर असर पड़ सकता है।
कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद कई दशकों पुराना है। दोनों राज्य नदी के पानी के बंटवारे को लेकर अपनी-अपनी मांगें रखते रहे हैं। समय-समय पर यह मामला न्यायिक और प्रशासनिक स्तर पर भी पहुंचा है। कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार दोनों राज्यों को पानी के वितरण को लेकर फैसले लेने होते हैं।
बैठक में शामिल नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि कावेरी विवाद को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए। राज्य के हितों की रक्षा के लिए सभी दलों के बीच समन्वय जरूरी है।
मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बैठक के माध्यम से सभी दलों से सहयोग मांगा और कहा कि राज्य सरकार किसानों और जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लेगी। उन्होंने कहा कि सरकार कावेरी जल से जुड़े हर पहलू पर गंभीरता से विचार कर रही है।
बैठक के बाद नेताओं ने उम्मीद जताई कि केंद्र और संबंधित संस्थाओं के साथ बातचीत के माध्यम से इस विवाद का बेहतर समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने जल प्रबंधन को मजबूत करने, जल संरक्षण बढ़ाने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाएं बनाने पर जोर दिया।
कावेरी जल विवाद केवल पानी के बंटवारे का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह दोनों राज्यों के लाखों किसानों और करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है। ऐसे में सभी पक्षों की सहमति और वैज्ञानिक आधार पर तैयार नीति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल सर्वदलीय बैठक के बाद राज्य सरकार आगे की रणनीति तैयार करने में जुट गई है। आने वाले दिनों में कर्नाटक सरकार इस मुद्दे को लेकर केंद्र और संबंधित प्राधिकरणों के सामने अपना पक्ष रखने की तैयारी कर सकती है।





